ये 6 चीज़ें चेक कीजिए, वरना वेबसाइट कभी रैंक नहीं करेगी|

ये 6 चीज़ें चेक कीजिए, वरना वेबसाइट कभी रैंक नहीं करेगी|

ये 6 चीज़ें चेक कीजिए, वरना वेबसाइट कभी रैंक नहीं करेगी|

वेबसाइट का नया होना या फिर काफी मेहनत के बाद भी वेबसाइट का रैंक न करना एक परेशानी वाली बात है, आपने वेबसाइट भी बनवा ली, वेबसाइट डिज़ाइनर को पैसे भी दिए फिर भी वेबसाइट रैंक नहीं हो रही, और चूंकि वो रैंक नहीं हो रही इसलिए आपको बिज़नेस भी नहीं आ रहा|
तो इस आर्टिकल में मैं वो पांच सीक्रेट बताऊंगा जो वेबसाइट के रैंक न करने का रीज़न है| हालांकि बिज़नेस की ज़रुरत हर वक्त होती है पर करोनकाल परेशानी का समय है, इस वक्त अगर वेबसाइट से बिज़नेस आ जाए तो बस काम बन जाएगा| संभवतः आप में से काफी सरे ऐसा ही सोच रहे हैं,
मैं सोचता हूँ हमारे जैसे डिजिटल मार्केटर्स को लोगों कि मदद करनी ही चाहिए. ऐसे में हम न सिर्फ एक व्यक्ति कि मदद करेंगे बल्कि अपने देश का व्यापार भी अंतराष्ट्रीय मंच तक ले जा सकेंगे| सबका भला तो अपना भला|

मैं हूँ साइबरटूथ इंडिया, और मैं आपको इस आर्टिकल में वो चीज़ें बता दूंगा जो आपकी वेबसाइट को न सिर्फ रैंक करा देगी बल्कि आपको नए कस्टमर्स भी देगी| बस ज़रुरत है कि आप इन बातो को भूलें नहीं और हो सके तो वो ५ पॉइंट्स कहीं नोट कर लीजिए| कोई सवाल हो तो आप नीचे लिखी ईमेल ID पर पूछ सकते हैं|

info@cybertoothindia.com

इस पेज को कहीं बुकमार्क कर लें क्योंकि मैं उन्ही आर्टिकल्स को लिखता हु जिसकी आपको जब ज़रुरत है| तो समय बचाते हैं और सीधे पॉइंट्स पर आते हैं|

Aherf के अनुसार १० में से सिर्फ एक वेबसाइट ही रैंक करती है, बाकि नौ वेबसाइट को कुछ नहीं मिलता, मतलब साफ़ है कि ये जो १ वेबसाइट है ज़रूर कुछ ऐसा करती है जो बाकी नौ websites ने नहीं किया|

कारण नंबर 1: आपकी वेबसाइट कि कोई बैकलिंक नहीं है.

गूगल खुद ये बता चुका है कि वेबसाइट कि रैंकिंग में बैकलिंक्स कितनी महत्त्वपूर्ण हैं| विश्वप्रसिद्द टूल AHERF और कई अंतराष्ट्रीय researchers का ये मानना रहा है कि वाकई बैकलिकिंग आपकी वेबसाइट का भाग्यपरिवर्तन कर सकती है| आप कि वेबसाइट का कंटेंट बहोत ही अच्छा है या अपने कोई टूल बनाया है तो ये तय है कि आपको नेचुरल बैकलिंक्स organically मिल जाएंगी| लोग आपकी वेबसाइट का रिफरेन्स अपनी वेब्सीटेस पर देंगे, सोशल मीडिया पर आपका कंटेंट शेयर होगा, इस से आपको नेचुरल बैकलिंकिंग मिल जाती हैं|
पर यहाँ पर एक पेंच है, समस्या दरअसल भारतीय वेबसाइट ओनर्स कि सोच में है| अगर आप भारत के बहार होते तो हमने देखा है कि लोड अच्छे कंटेंट को लिंक करते हैं, रिफरेन्स देते हैं पर हमारे यहाँ इस उदारता का आभाव है| ज़्यादार डिजिटल मार्केटर्स इस बात से सहमत होंगे, कि ज़्यादातर लोग हमारी इस कम्युनिटी में दुसरे को लिंक इसलिए नहीं करते क्योंकि उनको अपने से ज़्यादा दूसरों के फायदे से समस्या है, वो बाहर के कंटेंट को तो लिंक कर देंगे, पर अगर कंटेंट इंडियन वेबसाइट का है तो वो इग्नोर कर देंगे| तो मतलब कि बात ये कि आप ये नेचुरल बैकलिंकिंग की अपेक्षा न करें, ऐसा नहीं है की सब एक जैसे हैं पर आपको ज़्यादा बैकलिंक यहाँ से नहीं मिलेंगी ये तय है|

तो किया क्या जाए अगर आपको बैकलिंक्स इंडिया से नहीं मिल रही| तो इसका जवाब ये है की आपको खुद ही बैकलिंक्स मैन्युअल बनानी हैं| मैं रिपीट करता हूँ, कि आपको खुद ही बैकलिंक्स मैन्युअल बनानी हैं|

कारण नंबर 2: गूगल आप पर ध्यान नहीं दे रहा, और आप search snippets में आने का मौका खो रहे हैं|

search स्निपपेट्स के लिए ये इमेज देखिये:

FAQ डालिये, क्योंकि अगर ये वेबसाइट पर हुए तो आपकी वेबसाइट पर भयंकर ट्रैफिक आ जाता है, जिसका सीधा फायदा आपको मिलना ही है|

कारण नंबर 3: आपने अपनी वेबसाइट कि ऑडियंस अभी तक नहीं बनाई|

अगर मैं कंघे का ad करता हूँ और गंजों के बीच करता हूँ तो कितने बिकेंगे? बात गंजों कि नहीं है, कोई भी कभी भी हो सकता है, हमारे ऑफिस में आधे गंजे ही हैं| 😊  तो मतलब कि बात ये कि अगर आप कंघे बेचते हैं तो आप वही बेचेंगे जहाँ वो बिकता है, और वही खरीदेंगे जिनको इसकी ज़रुरत है| आपका कंटेंट ऐसा होना चाहिए जो लोगों के काम का हो| लिखने से ज़्यादा समय इस बात को दीजिये कि लिखना किसके लिए है और किसका फायदा आप करना चाहते हैं, हमेशा अपने ग्राहक के फायदे के बारे में सोचिये आपका फायदा अपने आप हो जाएगा|
जैसे मैं बरसों से ब्लॉग्गिंग कर रहा था पर मुझे तब इसका पता चला जब मैंने लोगो के फायदे के बारे में लिखा, और हमें बहोत उत्साहवर्धक कमैंट्स भी मिलने लगे, अब लोग हमें इसलिए नहीं पसंद करते क्योंकि हमें टेक्निकल जानकारी अच्छी है बल्कि इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि अब हमारा goal कस्टमर के बारे में सोचना है| कस्टमर्स खुद हमारे बारे में सोचने लगते हैं|
ऊपर के दो उदाहरण किसी का भी मनोबल बढ़ा सकते हैं, अगर आपको ये पता है की प्रोडक्ट का बाजार कहाँ पर है तो लोग इनमे इंटरेस्ट लेंगे. इंटरेस्ट लेंगे तो पढ़ेंगे, जिस से ट्रैफिक आएगा, आपकी वेबसाइट का Domain Authority बढ़ेगा, गूगल आपकी वेबसाइट को वैल्यू देगा जिस से आप की वेबसाइट ऊपर आएगी और हम शर्त लगा सकते हैं कि फिर आपको बिज़नेस भी मिलेगा.

“यूनिवर्स ऐसे ही काम करता है, आप दूसरों को देने कि सोचिये, प्रयास कीजिए, आपको खुद मिल जाएगा. यहाँ आप सिर्फ अच्छी इनफार्मेशन ही दे सकते हैं, तो दीजिए ना, मेहनत लगेगी, पर बिज़नेस क्या बिना मेहनत के कर रहे हैं, सही दिशा में कीजिये अच्छे परिणाम न मिलें ये हो ही नहीं सकता”

कारण नंबर 4: आपके पेजेज पर टेक्स्ट का बिखरा हुआ ढेर

थोड़ा जूनियर स्कूल्स कि तरफ चलते हैं, हमें निबंध लिखना क्यों सिखाते थे, कभी सोचा है आपने? नहीं ना? क्योकि शायद हमें ज़रुरत नहीं पड़ी| लिखना एक तरीका है न कि कला, अभी आपकी वेबसाइट पद बहोत कुछ लिखा हुआ है, आपने हर चीज़ को बढ़ा चढ़ा कर लिखा, नो प्रोब्लेम, इसे प्रेजेंटेशन कहते हैं पर ये लम्बे लम्बे अव्यवस्थित लेख पढ़ने योग्य नहीं होते|
अगर इस में आपने अच्छी इनफार्मेशन भी शेयर कि है तो भी कोई नहीं पढ़ेगा|

  1. लिखने के लिए आपको हेडिंग्स का इस्तेमाल करना चाहिए, ये पढ़नेवाले को आसानी से समझ आ जाएगा, और वो जितना हिस्स्सा न पड़ना चाहेंगे वो उसे छोड़ भी सकते हैं, याद रहे यूजर कि आसानी ही वेबसाइट का उद्द्येश्य है.
  2. बहोत लम्बे लम्बे पैराग्राफ न लिखिए जब तक ज़रूरी न हो
  3. किसी दुसरे पेज से कंटेंट उठाया है तो उसका रिफरेन्स दें.

इन कुछ बातों का ध्यान रखेंगे तो आया हुआ रीडर एक बार पढ़ेगा ज़रूर.

 

कारण नंबर 5: HTTPS का न होना|

क्या आपको मालूम है वेबसाइट के लिए गूगल कि कुछ गाइडलाइन्स हैं, इन गाइडलाइन्स में एक बहोत ज़रूरी बात वेबसाइट कि सिक्योरिटी है, गूगल नहीं चाहता कि गूगल पर एक बिना सिक्योरिटी कि वेबसाइट मिले, यूजर वहां जाए, अपनी इनफार्मेशन शेयर करे और वो इनफार्मेशन हैकर तक चली जाए. अपने यूजर कि सुरक्षा के लिए गूगल ने ये निर्णय लिया.
ये HTTPS होता क्या है?
HTTPS एक तरह कि सिक्योरिटी है, जो आपके ब्राउज़र (गूगल क्रोम) और वेबसाइट सर्वर के बीच होती है| आप जो पासवर्ड डालते हैं उसकी सुरक्षा के लिए इसे लगाया जाता है| पर ये भी कई तरह कि होती है| आप इसे godaddy कि वेबसाइट से खरीद सकते हैं, जैसे डोमेन खरीदा था वैसे ही ये भी वही से मिल जाता है|
कभी आपने बैंक कि वेबसाइट देखी हैं, उनमे वेबसाइट के पहले एक लॉक बनकर आता है, ऐसे-

बिना HTTPS के वेबसाइट में नॉट सिक्योर लिखा आता है, पहले ये गूगल ने अपने ब्राउज़र क्रोम में किया फॉर इसकी देखा देखि बाकि ब्राउज़र ने भी ये कर दिया, अब आप वेबसाइट कही खोलिये, क्रोम, मोज़ेल्ला, इंटरनेट एक्स्प्लोरर हर एक जगह नॉट सिक्योर ही लिख मिलेगा.
इसके २ फायदे हैं: पहला ये कि,
आपके वेबसाइट पर आने वाले को नॉट सिक्योर नहीं मिलेगा, और वो ज़्यादा भरोसा कर पाएगा.
और दूसरा ये,
आपकी वेबसाइट रैंक भी अच्छे से होगी|

निष्कर्ष:

  1. अपनी ऑडियंस बनाइये
  2. कंटेंट अच्छा लिखिए
  3. स्कीमा मार्कअप प्रयोग कीजिये
  4. बिखरे हुए टेक्स्ट को व्यवस्थित लिखिए
  5. वेबसाइट में HTTPS (SSL) का प्रयोग कीजिये.

आपकी वेबसाइट रैंक हो जाएगी, यही ५ कारण हो सकते हैं जो आपकी वेबसाइट रैंक नहीं कर रही, और अगर ऐसे ही करते रहे तो कभी करेगी भी नहीं|
आप अगर कोई सवाल पूछना चाहें तो आपका स्वागत है, ज़रूरी नहीं कि आप हमारे कस्टमर हों, तभी हम आपकी हेल्प करेंगे| आप ईमेल कर सकते हैं, बस ईमेल के सब्जेक्ट को निम्न शब्दों से स्टार्ट कीजिए. हम जवाब ज़रूर देंगे, चाहे आप कस्टमर हों, स्टूडेंट हों, या कोई भी कारण हो|

Alternatively, you can ask this in comment section too, that is at the end of article.

Mail ID: cybertoothindia@gmail.com

पढ़ने के लिए धन्यवाद,

Team Cybertooth Incorporation
www.cybertoothindia.com

 

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2020-05-30T15:57:06+05:30

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